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01 नवम्बर 2000 को भारतीय गणतंत्र के 26वे राज्य के रूप मे देश के मानचित्र मे अवतरित होते ही

छत्तीसगढ शासन,ऊर्जा विभाग के अधीन मुख्य विद्युत निरीक्षक (विभागाध्यक्ष) का कार्यालय अस्तित्व मे आ गया।

विद्युत निरीक्षकालय का मुख्य उद्देश्य विद्युत का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने एवम विद्युत।

दुर्घटनाओ की रोकथाम के लिये स्थापनाओ का प्रभावी निरीक्षण कर उपभोक्ताओ को आवश्यक सलाह देना, तारमिस्त्री एवम पर्यवेक्षक परीक्षाओ का आयोजन कर तत्सम्बन्धि अनुज्ञा जारी करना 'अ' एवम 'ब' वर्ग विद्युत ठेकेदारो का लायसेंस जारी करना तथा निरीक्षण शुल्क ,विद्युत शुल्क एवम उर्जा विकास उपकर के रूप मे राजस्व की वसूली करना है।विद्युत चोरी के प्रकरणो मे आरोपी से प्रशमन शुल्क प्राप्त होने पर राजीनामा किया जाना ।